मुझे मेरे सही गुरु से पहला साक्षात्कार बी ए के दौरान हुआ. एमए करते - करते उनका पूरा आशीर्वाद मेरे साथ रहा. डॉ. ओम प्रभाकर देश के जाने माने साहित्यकार तो है ही साथ ही मुझे एक गुरु के रूप में उनका सानिध्य भी मिला यह मेरा सौभाग्य रहा. गुरु जी मै फ़िलहाल आपके सम्पर्क में नहीं हूँ , लेकिन आप जहां भी रहें हजारों साल जियें एक शिष्य के रूप में ईश्वर से मेरी यही कामना है.
नाचते रोबोट, सिकुड़ने वाली कार
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नाचते रोबोट, बिन ड्राइवर की कारें, मानवीय भावनाएं पढ़ने वाली स्क्रीनें और नए जमाने के अजायबघर, जर्मनी में हो रहे सेबिट ट्रेड फेयर में ये सब कुछ मिलेगा.
3 घंटे पहले











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