मुझे मेरे सही गुरु से पहला साक्षात्कार बी ए के दौरान हुआ. एमए करते - करते उनका पूरा आशीर्वाद मेरे साथ रहा. डॉ. ओम प्रभाकर देश के जाने माने साहित्यकार तो है ही साथ ही मुझे एक गुरु के रूप में उनका सानिध्य भी मिला यह मेरा सौभाग्य रहा. गुरु जी मै फ़िलहाल आपके सम्पर्क में नहीं हूँ , लेकिन आप जहां भी रहें हजारों साल जियें एक शिष्य के रूप में ईश्वर से मेरी यही कामना है.
'जीना यहां, मरना यहां', सालों से नावों में रह रहे हैं ये परिवार
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आंध्र प्रदेश के पोलावरम ज़िले के चिंतूर में सबरी नदी पर ये लोग नावों में
रहते हैं. जन्म से मौत तक ये नाव ही उनका घर है. इसके पीछे की क्या वजह है?
2 घंटे पहले











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