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रविवार, 14 जून 2009

बहन जी बनाम दलित मसीहा

गत लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ-साथ अडवाणी के पी।एम. बनने के सपने पर भी पानी फिर गया. भाजपा अपनी इस पराजय को लेकर अंदरूनी क्लेश से गुजर रही है. उमा भारती का प्रसंग (राजनीति) तो विधानसभा चुनाव में ही ख़तम हो गयी थी। बहन जी यानी उप्र की सीएम मायावती का पीएम बनने का सपना भी चकनाचूर हो गया. पीएम बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने क्या-क्या नहीं किया ? कहीं ब्राम्हण सम्मलेन का आयोजन तो कहीं ...! बाबा साहब अम्बेडकर और कांसीराम की प्रतिमा के साथ अपनी आदम कद प्रतिमा लगवाकर बहन जी ने स्वयं को दलितों का मसीहा वाली श्रेणी में शामिल करने का कथित प्रयास किया है. अब बहन जी और उनकी पार्टी " खिसियानी बिल्ली ...!" वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को "नाटकबाज" कह कर वे स्वयं दलितों की मसीहा बनने के नौटंकी भरे कृत्यों और बयानबाजी पर उतर आयीं हैं.
समय - समय पर बहन जी द्वारा दिए जाने वाले बयान एक तरफ जहाँ उनकी सत्ता लोलुपता को ज़ाहिर करते हैं। दूसरी ओर वोट बैंक बचाए रखने की मंशा के भी परिचायक हैं . इस तरह के कृत्य और बयान समाज में जातीय विभाजन और द्वेष भावना के अतिरिक्त कोई काम नहीं कर सकते. अगर "बहन जी" ने अपना रवैया नहीं बदला तो उनका राजनीतिक भविष्य भी "दीदी" की तरह हो जायेगा।
चलते - चलते- मुफ्त की एक सलाह - बहन जी ! आप उप्र के किसी शांत और रमणीय स्थल से महापौर का चुनाव लड़िये संभवतः आपकी विजय होगी.और शुकून भरा जीवन व्यतीत करियेगा.

4 टिप्‍पणियां:

दिल दुखता है... ने कहा…

अपने सही कहा.... बिल्ली खिसिया रही है.. तो खम्बा ही नोचेगी. ये तो महान लोगो को मुर्ख और नाटकबाज के साथ पागल समझती है ( जग जाहिर है की इसने कांशीराम जी को पागल घोषित कर के कैद में रखा अपनी राजनीती चमकाने के लिए.) और अपने आप को खुदा समझती है तभी तो अपनी आदमकद मूर्तियाँ लगवा रही है.. पार्को में. खुद कुछ बोलती है कुछ करती है...

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

dukh doosara hai bhai..jis virasat ko itani mehanat se logon ne sahejii thii vah take ke bhav bech dii in logon ne.

ARVI'nd ने कहा…

jagi india jago

SP SINGH ने कहा…

ckr rks lgh gS ij ek;k egk Bfxuh ge tkuh.