मंगलवार, 19 अगस्त 2008
खेल पत्रकारिता में भविष्य
प्रस्तुतकर्ता
आशेन्द्र सिंह
पर
10:05 pm
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शुक्रवार, 15 अगस्त 2008
स्वत्रंत्रता दिवस की शुभकामनाएं
सभी देश वासियों को
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
-अपनीबात टीम
प्रस्तुतकर्ता
आशेन्द्र सिंह
पर
12:16 am
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लेबल: शुभकामनाएं
रविवार, 10 अगस्त 2008
लक्ष्य से भटका मीडिया
प्रस्तुतकर्ता
आशेन्द्र सिंह
पर
1:28 am
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लेबल: मीडिया- अध्ययन-रिपोर्ट
टीआरपी का धंधा
प्रस्तुतकर्ता
आशेन्द्र सिंह
पर
1:20 am
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लेबल: चैनल-टीआरपी-विश्लेषण
शनिवार, 2 अगस्त 2008
नई सोच का दख़ल
युवा शक्ति और उसकी रचनात्मक सोच हमेशा से क्रांति की द्योतक रही है। यही क्रांति इतिहास के सफ़ों को समृद्ध करती आई है। बात सामाजिक परिवर्तन की हो अथवा वैचारिक क्रांति की युवाओं की शक्ति और सोच की भूमिका को नकारा नही जा सकता। ग्वालियर (जो कि मेरा गृह नगर है) में कुछ दिनों पूर्व युवा पत्रकार फिरोज़ खान के मार्फ़त मेरी मुलाक़ात अशोक भाई से हुई। अशोक भाई युवा होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विषयों के एक अच्छे लेखक भी हैं। उनके बारे में यह कहना भी लाज़िमी होगा कि आप विचारों की शक्ति से बदलाव बनाम सुधार पर भी यकीन रखते हैं। अशोक भाई के आलेख पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में अशोक कुमार पाण्डेय के नाम से पढ़े जा सकते है। अशोक और राजेंद्र भाई जैसे कुछ और युवा साथियों ने 'युवा संवाद' के नाम से एक अनौपचारिक संगठन बनाया है। बकौल अशोक भाई यह संगठन प्रदेश के विभिन्न शहरों में युवाओं को जोड़ कर आगे बढता जा रहा है। युवा संवाद की ग्वालियर शाखा ने हाल ही में ' नई दख़ल' नामक एक न्यूज़ लेटर का प्रकाशन शुरू किया है। शुरूआती दौर की कई स्वाभाविक कमियों से सम्पन्न इस न्यूज़ लेटर में युवाओं ने अपने कुछ कर गुज़रने के ज़ज्बे और विचारों का अच्छा निवेश किया है। फ़िलहाल दो माह में एक बार प्रकाशित होने वाले 'नई दख़ल' को लेकर 'युवा संवाद' के पास कई योजनाएं हैं। मुझे 'नई दख़ल' का दूसरा अंक मिला है। इस अंक में शहीद भगत सिंह के आलेख के साथ-साथ सुभाष गाताडे का विशेष आलेख 'अथ श्री मेरिट कथा' का प्रकाशन किया गया है। आठ प्रष्ठीय इस न्यूज़ लेटर में युवा कथाकार जितेन्द्र बिसारिया की कहानी 'वे' के अतिरिक्त केरल के स्कूलों में चल रही पाठय पुस्तक से 'जाति विहीन जीवन' लघु कथा को शामिल किया गया है। दो कविताओं के साथ-साथ ग्रामीण जीवन व किसानों की बदहाली की चिंता करता हुआ अशोक चौहान के आलेख का प्रकाशन किया गया है। 'नई दख़ल ' में न्यूज लेटर का शीर्षक ही मन किरकिरा कर देता है। इस में लिंगगत दोष है। इसके अतिरिक्त उर्दू अल्फ़ाज़ों में नुक्तों का अभाव जैसी प्रारंभिक गलतियां इस प्रयास को वांक्षित प्रशंसा और सराहना से महरूम रखती हैं। आज हम जिस दौर से गुज़र रहे हैं यदि यहां कोई सामंतवादी या पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध करता है तो तथाकथित रूप से उसे कम्युनिष्टवादी करार दे देते है। 'नई दख़ल' में प्रकाशित सामग्री को भी इसी नज़रिए से देखा जा सकता है। दो रूपये मूल्य के 'नई दख़ल' में प्रिंट लाइन का न होना एक बडी लापरवाही है। चूंकि इस वैचारिक न्यूज़ लेटर का प्रकाशन समाज की सोच को बदलने की नेक मंशा के साथ किया गया है अतः नई दख़ल के आगामी अंको में हमें सुधार देखने को ज़रूर मिलेगा बशर्ते हम सभी अपनी प्रतिक्रियाओं से निरंतर अवगत कराएं। 'नई दख़ल' के सम्बन्ध में कोई भी ज़ानकारी अशोक भाई से उनके मोबाईल नम्बर 09425787930 पर ली जा सकती है । नई दख़ल का ई-मेल है- naidakhal@gmail.com अथवा kumar_ashok@sify.com
प्रस्तुतकर्ता
आशेन्द्र सिंह
पर
10:49 pm
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