(एक)
मां !
क्या सूख गया है ?
तुम्हारे स्तनों का दूध
तुम्हारी आँखों का पानी
या तुम्हारी ममता
जो -
संकट के बादल घिर आये हैं !
(दो)
मां !
क्या नहीं है ?
वह झूला
वह रातें, वे परियां
या वह लोरी
जो, आखों से उड़ गयी है नींद ...!
(तीन)
मां !
यहाँ क्या छूटा है ?
बचपन, जीवन
कलियाँ, मधुवन
या मैं, या तुम
या समय
(चार)
मां !
मैं तुम्हारे पेट मैं रहा
या तुम मेरे पेट में हो
तुमने मुझे जन्म दिया
या मैं तुम्हें दाग देने वाला हूँ
- आशेन्द्र
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो
हैं अनसुलझे
-
पिछले सप्ताह सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दे दी गई. लेकिन
कई दिनों बाद भी कई बुनियादी सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं.
1 घंटे पहले


4 टिप्पणियां:
माँ शब्द ही अद्भुत है...मदर्स डे पर आपकी कविता बहुत पसंद आई...माँ के आगे संसार की तमाम चीज़ें कुछ भी महत्त्व नहीं रखती..
माँ अम्मा ये कोई शब्द नही है मंत्र है। गर कोई इसे ही दुहराते रहे तो ईश्वर ही मिल जायेगे।
भावुक कवितायें
माँ पर मेरी एक कविता देखिये।
http://asuvidha.blogspot.com/2009/03/blog-post.html
MA KE CHARNO ME SWARG HOTA HAI. MA KHUSH TO SARI DUNIYA KI KHSHI MIL JATI HAI.
L.K.CHHAJER
THAR EXPRESS
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