गत लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ-साथ अडवाणी के पी।एम. बनने के सपने पर भी पानी फिर गया. भाजपा अपनी इस पराजय को लेकर अंदरूनी क्लेश से गुजर रही है. उमा भारती का प्रसंग (राजनीति) तो विधानसभा चुनाव में ही ख़तम हो गयी थी। बहन जी यानी उप्र की सीएम मायावती का पीएम बनने का सपना भी चकनाचूर हो गया. पीएम बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने क्या-क्या नहीं किया ? कहीं ब्राम्हण सम्मलेन का आयोजन तो कहीं ...! बाबा साहब अम्बेडकर और कांसीराम की प्रतिमा के साथ अपनी आदम कद प्रतिमा लगवाकर बहन जी ने स्वयं को दलितों का मसीहा वाली श्रेणी में शामिल करने का कथित प्रयास किया है. अब बहन जी और उनकी पार्टी " खिसियानी बिल्ली ...!" वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को "नाटकबाज" कह कर वे स्वयं दलितों की मसीहा बनने के नौटंकी भरे कृत्यों और बयानबाजी पर उतर आयीं हैं.
समय - समय पर बहन जी द्वारा दिए जाने वाले बयान एक तरफ जहाँ उनकी सत्ता लोलुपता को ज़ाहिर करते हैं। दूसरी ओर वोट बैंक बचाए रखने की मंशा के भी परिचायक हैं . इस तरह के कृत्य और बयान समाज में जातीय विभाजन और द्वेष भावना के अतिरिक्त कोई काम नहीं कर सकते. अगर "बहन जी" ने अपना रवैया नहीं बदला तो उनका राजनीतिक भविष्य भी "दीदी" की तरह हो जायेगा।
चलते - चलते- मुफ्त की एक सलाह - बहन जी ! आप उप्र के किसी शांत और रमणीय स्थल से महापौर का चुनाव लड़िये संभवतः आपकी विजय होगी.और शुकून भरा जीवन व्यतीत करियेगा.
'मेरी जगह अस्पताल में नहीं, फ़ाइटिंग केज में है': कश्मीर की एमएमए फ़ाइटर ने
कैसे पूरा किया पिता का सपना
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फ़िज़ा नज़ीर जम्मू-कश्मीर की एकमात्र महिला मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए)
फ़ाइटर हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई बार सफलता हासिल की
है.
2 हफ़्ते पहले

