मुझे मेरे सही गुरु से पहला साक्षात्कार बी ए के दौरान हुआ. एमए करते - करते उनका पूरा आशीर्वाद मेरे साथ रहा. डॉ. ओम प्रभाकर देश के जाने माने साहित्यकार तो है ही साथ ही मुझे एक गुरु के रूप में उनका सानिध्य भी मिला यह मेरा सौभाग्य रहा. गुरु जी मै फ़िलहाल आपके सम्पर्क में नहीं हूँ , लेकिन आप जहां भी रहें हजारों साल जियें एक शिष्य के रूप में ईश्वर से मेरी यही कामना है.
मक्का समझौता: अरब मीडिया क्या लिख रहा है, मिस्र के न होने पर क्यों उठ रहे
हैं सवाल
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बीते शुक्रवार को मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के नेताओं ने एक
त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसमें कहा गया है कि एक देश पर
हमला तीनों...
16 घंटे पहले

