हम सब की ज़िन्दगी से किताबों का अन्योन्याश्रित नाता है. किताबों में हमारे ख़्वाब भी रहते हैं और कुछ सूखे हुए गुलाब भी, और बहुत कुछ
जिसे आसानी से नहीं कहा जा सकता. सफ़दर हाश्मी साहब की ये कविता आप तक पंहुचा रहा हूँ. किताबें और क्या - क्या कहना चाहतीं हैं समझने की कोशिश कीजिए.
किताबें
करती हैं बातें
बीते ज़मानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की
एक एक पल की
खुशियों की, ग़मों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की
क्या तुम नहीं सुनोगे
किताबों की बातें ?
किताबें कुछ कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं
किताबों में चिडियां चहचहाती हैं
किताबों में खेतियां लहलहाती हैं
किताबों में झरने गुनगुनाते हैं
परियों के किस्से सुनाते हैं
किताबों में रोकिट का राज़ है
किताबों में साइंस की आवाज़ है
किताबों का कितना बड़ा संसार है
किताबों में ज्ञान की भरमार है
क्या तुम इस संसार में
नहीं जाना चाहोगे ?
किताबें कुछ कहना चाहतीं हैं
तुम्हारे पास रहना चाहतीं हैं
गोरखा सैनिकों की भर्ती के मुद्दे पर भारत के नेपाल से 'बातचीत न करने' की वजह
क्या है?
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भारतीय सेना के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि गोरखा भर्ती को आगे
बढ़ाने या न बढ़ाने का फ़ैसला अब नेपाल पर निर्भर करता है.
1 दिन पहले

