मुझे मेरे सही गुरु से पहला साक्षात्कार बी ए के दौरान हुआ. एमए करते - करते उनका पूरा आशीर्वाद मेरे साथ रहा. डॉ. ओम प्रभाकर देश के जाने माने साहित्यकार तो है ही साथ ही मुझे एक गुरु के रूप में उनका सानिध्य भी मिला यह मेरा सौभाग्य रहा. गुरु जी मै फ़िलहाल आपके सम्पर्क में नहीं हूँ , लेकिन आप जहां भी रहें हजारों साल जियें एक शिष्य के रूप में ईश्वर से मेरी यही कामना है.
जब कश्मीर मुद्दे पर ईरान ने दिया था भारत का साथ, लेकिन क्या दोनों देशों के
संबंध दोस्ताना रहे हैं?
-
भारत की आज़ादी के बाद से अब तक ईरान के साथ उसके संबंधों में कई चढ़ाव-उतार
देखे गए. इसराइल-अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद भारत के रुख़ ने ईरान से साथ
उसके स...
1 घंटे पहले


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें