लखवी को जमानत मिलने का मतलब है कि पेशावर बाल संहार के दोषियों को उनके
पेरेंट्स ने माफ कर दिया है। क्या यह संभव है अगर नहीं तो क्या इसे यह समझा जाना चाहिए कि यह दुनियां के लिए एक संदेश है कि हमारी धरती पर कुछ भी हो आतंकवाद को लेकर हम अपना रवैया नहीं बदलेंगे। मासूमों के खून से सनी किताबें चीख - चीख कर कह रही हैं कि यह पन्ने तो सिर्फ पेटिंग बनाने के लिए हैं इन पर खून से यह अबूझ इबारत क्यों लिख डाली।
लाहौर में 19 साल बाद लौटी बसंत की बहार, रंगों से जगमगाया आसमान
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तेज़ धार वाले मांजे, लोगों के छतों से गिरने और जश्न के दौरान हवाई फ़ायरिंग
में लोगों के घायल होने और जान गंवाने के बाद पाकिस्तान में सदियों पुराने इस
उत्सव...
8 घंटे पहले

